भू - प्रबंध

वन भूमि व्यपवर्तन :


आरक्षित एवं संरक्षित वनों में प्रतिबंधित गतिविधियों की अनुमति दिये जाने के विशेष अधिकार भारतीय वन अधिनियम, 1927 के अंतर्गत राज्य सरकार तथा वन अधिकारियों में निहित हैं । भारत सरकार ने वर्ष 1980 में वन (संरक्षण) अधिनियम 1980 लागू किया जिसके अंतर्गत यह प्रावधानित है कि कोई राज्य शासन अथवा वन अधिकारी भारत सरकार के पूर्व अनुमोदन के पश्चात ही वन भूमि के गैर वानिकी उपयोग हेतु आदेश दे सकेंगे । इस प्रावधान द्वारा राज्य सरकार तथा वन अधिकारियों के गैर वानिकी उपयोग की अनुमति देने के असीमित अधिकारों को सीमित किया गया है । इस अधिनियम की धारा - 2 के अंतर्गत निम्न प्रावधान हैं : -
किसी राज्य में तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुये भी, कोई राज्य सरकार या अन्य प्राधिकारी यह निर्देश करने वाला कोई आदेश, केंद्रीय सरकार के पूर्ण अनुमोदन के बिना नहीं देगा : -
  1. कि कोई आरक्षित वन उस राज्य में तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में "आरक्षित वन" पद के अर्थ में या उसका कोई प्रभाग आरक्षित नहीं रह जायेगा ।
  2. कि किसी वन भूमि या उसके किसी प्रभाग को किसी वनेत्‍तर प्रयोजन के लिए उपयोग में लाया जाए।
  3. कोई वन भूमि या उसका कोई प्रभाग पट्टे पर या अन्‍यथा किसी प्राइवेट व्‍यक्ति या किसी प्राधिकरण, निगम, अभिकरण या आय संगठन को, जो सरकार के स्‍वामित्‍व, प्रबन्‍ध, नियंत्रण के अधीन नहीं है, समनुदेशित किया जाए।
  4. किसी वन भूमि या उसके किसी भाग से, पुर्नवनरोपण के लिए उसका उपयोग करने के प्रयोजन के लिए, उन वन वृक्षों को, जो उस भूमि या प्रभाग में प्राकृतिक रूप से उग आए हैं, काटकर साफ किया जा सकता है।

किसी भी आवेदक संस्‍थान द्वारा वन भूमि का गैर वानिकी उपयोग प्रस्‍तावित होने पर वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के अन्‍तर्गत निर्धारित प्रारूप में निश्‍चित अभिलेखों के साथ ऑनलाईन आवेदन प्रस्‍तुत किया जाना अपेक्षित है जो कि क्षेत्रीय अधिकारियों के परीक्षण एवं राज्‍य सरकार के अनुमोदन उपरान्‍त भारत सरकार को भेजा जाता है। भारत सरकार द्वारा प्रकरण में कुछ शर्तों के साथ सैद्धांतिक अनुमति दी जाती है। आवेदक तथा क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा शर्तों की पूर्ति उपरान्‍त भारत सरकार से वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 की धारा-2 के अंतर्गग्‍त वन भूमि के गैर वानिकी उपयोग हेतु औपचारिक अनुमोदन प्राप्‍त किया जाता है। भारत सरकार के औपचारिक अनुमोदन उपरान्‍त राज्‍य शासन द्वारा वन भूमि के गैर वानिकी उपयोग हेतु स्‍वीकृति जारी की जाती है।

वन (सरंक्षण) अधिनियम लागू होने के पश्‍चात्‍ से प्राप्‍त आवेदनों एवं उनके निराकरण की स्थिति तालिका में दर्शित है।


प्राप्त आवेदन एवं निराकरण
क्र. विवरण वर्ष 2012 वर्ष 2013 वर्ष 2014 वर्ष 2015
1. प्राप्त आवेदन 38 39 36 41
2. स्वीकृत प्रकरण 36 33 35 37
3. अस्वीकृत प्रकरण 18 - - 03
4. विचाराधीन प्रकरण - - 225 206
  (अ) सैद्धांतिक स्वीकृति हेतु प्रक्रियाधीन - - 93 77
  (ब) औपचारिक स्वीकृति हेतु प्रक्रियाधीन - - 132 129

 

वर्ष 1990 से दिसम्‍बर 2015 तक की अवधि में वन भूमि व्‍यपवर्तन का गोशवारा तालिका में दर्शित है।

उपयोगवार वन भूमि का व्यपवर्तन (हेक्टेयर में)
क्र. उपयोग 1980-1990 1991-2000 2001-2010 2011-2015 कुल व्यपवर्तित वन भूमि
 
प्रतिशत
व्यपवर्तित वन भूमि प्रतिशत व्यपवर्तित वन भूमि प्रतिशत व्यपवर्तित वन भूमि प्रतिशत व्यपवर्तित वन भूमि प्रतिशत
1. सिंचाई 62793.520 31.009 6367.356 16.153 8949.552 53.857 2202.280 21.5053 80312.708 29.880
2. विद्युत 2574.264 1.271 487.020 1.236 2369.214 14.258 2364.230 23.0867 7794.728 2.900
3. खनिज 4574.380 2.259 5676.676 14.401 4079.098 24.547 3618.310 35.3328 17948.464 6.678
4. विविध 701.469 0.346 4652.312 11.802 1213.107 7.300 2055.836 20.0752 8622.724 3.208
5. रक्षा 12458.038 6.152 22235.481 56.408 6.270 0.038 0.000 0.000 34699.789 12.910
6. अतिक्रमण 119401.716 58.963 0.000 0.000 0.000 0.000 0.000 0.000 119.401.716 44.424
कुल योग : - 202503.387 100.000 39418.845 100.000 16617.241 100.000 10240.656 100.000 268780.129 100.000
टीप :- 1. भारत सरकार से आंकड़ों के मिलान के उपरान्‍त कुछ उपयोग के आंकड़ों में भिन्‍नता आई है, जिसके अनुसार इस तालिका में सुधार किया गया है।
2. गत वर्ष के प्रतिवेदन में अतिक्रमण से संबंधित प्रकरणों की व्‍यपवर्तित भूमि सम्मिलित नहीं की गई थी, जिसे अब सम्मिलित कर दिया गया है।
पिछले 4 दशकों में वन भमि का गैर वानिकी पयोग हेतु व्‍यपवर्तन सतत् रूप से कम हुआ है तथा वन (संरक्षण) अधिनियम लागू होने के पश्‍चात से अधिकतम (29.9 प्रतिशत) वन भूमि का व्‍यपवर्तन सिंचाई उपयोग हेतु किया गया है। 7 वृहद सिंचाई परियोजनाओं में कुल 63250.639 हेक्‍टेयर एवं 224 लघु सिंचाई परियोजनाओं में 17062.069 हेक्‍टेयर वन भूमि व्‍यपवर्तन हुआ है। वर्षवार विभिन्‍न गैर वानिकी कार्यों के उपयोग हेतु व्‍यपवर्तित वन भूमि का उपयोग अनुसार विवरण परिशिष्‍ट-3 में संलग्‍न है।

वर्ष 2015 में भूमि व्‍यपवर्तन के निराकृत प्रकरण तालिका में दर्शित है।

जनवरी 2015 से दिसम्बर 2015 तक निराकृत प्रकरण
क्र. उपयोगकर्ता एजेंसी प्रकरण संख्या व्यपवर्तित वन भूमि प्रतिशत
1. सिंचाई 8 215.73 9.360
2. विद्युत 9 670.626 29.098
3. खनिज 4 81.214 3.524
4. विविध (मार्ग / रेलवे आदि) 16 1337.135 58.018
योग : - 37 2304.705 100.00
उपरोक्‍तानुसार वर्ष 2015 में अधिकतम (58 प्रतिशत) वन भूमि का व्‍यपवर्तन मार्गों / विविध कार्यों हेतु किया गया है।

भारत सरकार द्वारा अधिसूचना दिनांक 10.10.2014 से वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 में संशोधन करते हुए दिनांक 01.11.2014 से समस्‍त रेखीय (सड़क, नहर, विद्युत लाईन एवं रेल्‍वे लाईन) के प्रकरणों की स्‍वीकृति तथा शेष प्रकरणों में (उत्‍खनन, जल, विद्युत परियोजनायें तथा अतिक्रमण के प्रकरणों को छोड़कर) 40 हेक्‍टेयर तक वन भूमि व्‍यपवर्तन की स्‍वीकृति के अधिकार भोपाल स्थित भारत सरकार के क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत गठित क्षेत्रीय साधिकार समिति को सौंपे गये हैं।

विगत वर्षों में प्रशासनिक तत्‍परता एवं प्रक्रिया के सरलीकरण के कारण, वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के अन्‍तर्गत प्रस्‍तावित प्रकरणों की स्‍वीकृति में लगने वाले समय में काफी सुधार हुआ है। विशेष रूप से प्रकरणों की ऑनलाईन स्‍वीकृति प्रक्रिया लागू करने से तथा प्रक्रिया के सरलीकरण के कारण प्रकरणों का निराकरण अधिक शीघ्रता से हो रहा है।

वर्ष 2014-15 मे स्‍वीकृत महत्‍वपूर्ण प्रकरणों की सूची परिशिष्‍ट-4 में संलग्‍न है।

सामान्य स्वीकृति :

एक हेक्टे‍यर से कम वन क्षेत्र हेतु :

भारत सरकार, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा वन संरक्षण अधिनियम 1980 के अन्‍तर्गत कुछ शर्तों के अधीन शासकीय विभागों को एक हेक्‍टेयर से कम वनभूमि के व्‍यपवर्तन की सामान्‍य स्‍वीकृति दी गई है। इसके उपयोग की समय-सीमा 31 दिसम्‍बर 2018 तक बढ़ाई गई है। इसके अन्‍तर्गत स्‍कूल, मार्ग मरम्‍मत, अस्‍पताल, विद्युत व संचार लाईनें, पेयजल की व्यवस्था, रेन वाटर हारवेस्टिंग स्‍ट्रक्‍चर, गैर पारम्‍परिक ऊर्जा स्रोत, व्‍यावसायिक प्रशिक्षण केन्‍द्र, विद्युत सब स्‍टेशन, छोटी सिंचाई नहरें, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस स्‍थापा जैसे कि पुलिस स्‍टेशन, आउट पोस्‍ट, वाचटावर इत्‍यादि निर्माण कार्य लिये जा सकते हैं। प्रकरणों का विवरण तालिका में दर्शित है -

एक हेक्टेयर से कम वन भूमि व्यपवर्तन के प्रकरण
(03/01/2005 से 31/12/2013 तक) (01/01/2014 से 31/12/2014 तक) (01/01/2015 से 31/12/2015 तक)
प्राप्त स्वीकृत हेक्टेयर प्राप्त स्वीकृत हेक्टेयर प्रकरण संख्या स्वीकृत हेक्टेयर
313 313 129.092 31 31 21.475 158 146 80.241
मध्यप्रदेश शासन वन विभाग के परिपत्र क्र. एफ-5-11/2006/10-3 दिनांक 13.6.2014 द्वारा एल.डब्यू .ई. (Left Wing Extermism) प्रभावित जिलों, अनूपपुर, बालाघाट, डिण्डौरी, मण्डला, सिवनी, शहडोल, सीधी, उमरिया, छिन्दवाड़ा एवं सिंगरौली में जनपयोगी विकास कार्यों हेतु भारत सरकार द्वारा वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के अन्तर्गत निर्धारित शर्तों के अधीन प्रदत्त 2.00 हेक्टेयर के स्थान पर 5.00 हेक्टेयर तक वनभूमि व्यपवर्तन की सामान्य स्वीकृति अनुसार क्षेत्रीय वन मण्डल अधिकारियों को वन भूमि व्यपवर्तन की अनुमति दी गई है। प्रकरणों का विवरण तालिका में दर्शित है।

5 हेक्टेयर तक स्वीकृत वन भूमि व्यपवर्तन के प्रकरण
(28/01/2011 से 31/12/2013 तक) (01/01/2014 से 31/12/2014 तक) (01/01/2015 से 31/12/2015 तक)
प्राप्त स्वीकृत हेक्टेयर प्राप्त स्वीकृत हेक्टेयर प्रकरण संख्या स्वीकृत हेक्टेयर
95 95 74.286 18 18 24.472 14 13 32.705

अनुसूचित जनजाति और अन्‍य परम्‍परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्‍यता) अधिनियम 2006 एवं नियम 2008 की धारा 3(2) के तहत ग्राम सभा की अनुशंसा पर एक हेक्‍टेयर से कम वनभूमि, जिनमें प्रति हेक्‍टेयर 75 से अधिक वृक्ष नहीं काटे जाएंगे, निम्‍न विकास कार्यों के लिये व्‍यपवर्तन हेतु निर्धारित शर्तों पर अनुमति दी गई है :-

पाठशालाएँ, चिकित्‍सालय, आंगनवाड़ी, उचित मूल्‍य की दुकानों, विद्युत एवं दूरसंचार लाईनें, टंकियाँ और अन्‍य लघु जलाशय पेयजल की आपूर्ति हेतु जल प्रदाय के लिये पाईप लाइनें, जल या वर्षा जल संचयन संरचनाएँ, लघु सिंचाई नहरें, अपारम्‍परिक ऊर्जा स्रोत, कौशल उन्‍नयन या व्‍यावसायिक प्रशिक्षण केन्‍द्र, सड़कें तथा सामुदायिक केन्‍द्र।

स्‍वीकृति हेतु विस्‍तृत प्रक्रिया भारत सरकार के पत्र क्रमांक 23011/15/2008 एसजी दिनांक 18 मई, 2009 द्वारा जारी की गई है तथा राज्‍य शासन द्वारा इस संबंध में निर्देश दिनांक 29.05.2009 को जारी किए गए हैं।

कच्चे मार्गों का उन्नयन :

भारत सरकार के ज्ञापन दिनांक 30.04.2005 द्वारा वन क्षेत्र से गुजर रहे 1980 के पूर्व निर्मित कच्‍चे मार्गों के उन्‍नयन हेतु सामान्‍य स्‍वीकृति प्रदान की गई है। म.प्र. शासन वन विभाग के ज्ञापन दिनांक 17.05.2005 द्वारा वनमण्‍डलाधिकारी को वनक्षेत्रों से गुजर रहे 25.10.1980 के पूर्व के कच्‍चे मार्गों के उन्‍ययन हेतु सशर्त अनुमति जारी करने के लिये अधिकृत किया गया है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के अन्‍तर्गत जारी भारत सरकार पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की अधिसूचना दिनांक 19.09.2006 के परिप्रेक्ष्‍य में उक्‍त योजनांतर्गत सड़कों के उन्‍नयन हेतु अलग से पर्यावरणीय स्‍वीकृति की आवश्‍यकता नहीं है। मार्गों के उन्‍नयन प्रकरण का विवरण तालिका में दर्शित है।

मार्ग उन्नयन के प्रकरण
योजना (वर्ष 1980 से दिसम्बर 2013 तक) (जनवरी 2014 से दिसम्बर 2014 तक) (जनवरी 2015 से दिसम्बर 2015 तक)
  प्राप्त स्वीकृत प्राप्त स्वीकृत प्राप्त स्वीकृत
प्रधान मंत्री ग्राम सडक योजना 2434 2423 101 90 179 141
मुख्य मंत्री ग्राम सडक योजना - 624 - 37 95 50
वर्ष 1980 के पूर्व की सडकों का उन्नयन - - - - - 22

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  • कार्यालय अ.प्र.मु.व.सं. (कक्ष-सूचना प्रौद्योगिकी),आधार- तल खंड ‘डी’, सतपुडा भवन, भोपाल- 462004
  • दूरभाष : +91 (0755) 2674302
  • फैक्स: +91 0755-2555480