अनुसंधान विस्तार एवं लोकवानिकी

अनुसंधान एवं विस्तार :


मध्‍यप्रदेश के वनों की उत्‍पादकता बढ़ाने एवं वन क्षेत्रों के बाहर सामुदायिक एवं निजी भूमि पर वनीकरण का कार्य किया जाकर वनोपज की आवश्‍यकता की पूर्ति हेतु प्रदेश के 11 कृषि जलवायु प्रक्षेत्रों में भोपाल, जबलपुर, रीवा, ग्‍वालियर, सागर, इन्‍दौर, खण्‍डवा, झाबुआ, रतलाम, सिवनी एवं बैतूल में एक-एक अनुसंधान एवं विस्‍तार वृत्‍त स्‍थापित किये गये हैं। प्रत्‍येक  अनुसंधान एवं विस्‍तार वृत्‍त के अन्‍तर्गत उच्‍च तकनीकी रोपणियाँ स्‍थापित की गई हैं। वर्तमान में 161 रोपणियाँ विभिन्‍न अनुसंधान एवं विस्‍तार वृत्‍तों में कार्यरत हैं, जहाँ सभीप प्रजातियों के उचित गुणवत्‍ता के सामान्‍य एवं ग्राफ्टेड पौधे तैयार किये जा रहे हैं।

वर्षा ऋतु 2015 में अनुसंधान एवं विस्‍तार वृत्‍त की रोपणियों से 439.66 लाख पौधे वन विभाग/अन्‍य शासकीय विभाग/निजी व्‍यक्तियों एवं संस्‍थाओं को प्रदाय किये गये हैं विभाग के बाहर पौधे विक्रय से 220.28 लाख रूपये का राजस्‍व प्राप्‍त हुआ है। विभिन्‍न रोपणियों में विगत पाँच वर्षों में तैयार किये गये पौधे, उनका निर्वतन एवं प्राप्‍त राजस्‍व का विवरण तालिका में दर्शित है।

रोपणी में सागौन पौध तैयारी
अनुसंधान विस्तार, सिवनी अनुसंधान विस्तार, भोपाल

तालिका :


रोपणी में तैयार पौधे एवं राजस्व
विवरण वर्षवार तैयार पौधे (संख्या - लाख में)
2011-12 2012-13 2013-14 2014-15 2015-16*
तैयार पौधे 744.48 814.58 941.25 1071.53 990.67
रोपणियों से निवर्तित पौधे (संख्या - लाख में)
विभागीय रोपण हेतु प्रदाय 212.32 282.30 341.75 409.84 395.79
अन्य शासकीय विभागों / पंचायतों को विक्रय 22.85 26.15 14.62 14.63 16.22
निजी व्यक्ति / संस्था को विक्रय 18.40 14.22 12.94 26.98 27.65
योग : - 253.57 322.67 369.31 451.45 439.66
पौधा विक्रय से प्राप्त राजस्व (राशि - रू. लाख में)
वन विभाग से 1.12 0.00 7.95 7.74 23.92
अन्य विभागों से 161.80 178.63 95.81 35.75 29.81
निजी व्यक्ति / संस्था से 94.87 100.51 90.07 136.64 15.46
योग : - 257.79 279.14 193.83 180.13 244.20
*नवम्बर 2015 तक

लोकवानिकी :


लोकवानिेकी अधिनियम, 2001, का मुख्‍य उद्देश्‍य निजी वृक्ष आच्‍छादित क्षेत्रों का वैज्ञानिक प्रबंधन करते हुए निजी वानिकी का प्रोत्‍साहन एवं उसे लाभदायक व्‍यवसाय बनाना है। लोकवानिकी योजना 01 मई, 2013 से पूरे प्रदेश में लागू की गई है। योजना के क्रियान्‍वयन के लिए मध्‍यप्रदेश लोकवानिकी नियम 2002 बनाये गये हैं। लोकवानिकी अंतर्गत 10 हे0 से कम क्षेत्र की प्रबंध योजनाओं की स्‍वीकृति संबंधित क्षेत्रीय वनमंडलाधिकारी एवं 10 हे0 से अधिक क्षेत्र की प्रबंध योजनाएँ भारत शासन द्वारा स्‍वीकृत की जाती हैं। सक्षम अधिकारी से प्रबंध योजना की स्‍वीकृति प्राप्‍त हो जाने के पश्‍चात्‍ यथास्थिति प्रत्‍येक भूमिस्‍वामी, ग्राम पंचायत या ग्राम सभा प्रबंध योजना के विधानों तथा शर्तों के अनुरूप उसक क्रियान्‍वयन कर सकते हैं। लोकवानिकी योजना अंतर्गत अब तक 10 हेक्‍टेयर से कम क्षेत्र की 2846 योजनाएँ एवं 10 हेक्‍टेयर से अधिक क्षेत्र की 31 प्रबंध योजनाएँ स्‍वीकृत हुई हैं।
अनुसंधान विस्तार, इंदौर

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