आज का वन्यप्राणी

मध्य प्रदेश का राज्य पशु
अंग्रेजी नाम : Hard-ground Barasingha
हिन्‍दी नाम : बारासिंघा
वैज्ञानिक नाम : Recurvus duvaucelii
विवरण :

एक बड़ा भूरे लाल रंग का मृग जो केवल कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में पाया जाता है संकटापन्न प्रजाति है जो लगभग लुप्त प्राय: होने की कगार पर है। नर मृग के शाखायुक्त सींग (antler) होते हैं जिनकी शाखाओं की संख्या एक-तरफ छ: एवं दूसरी ओर छ: होने के कारण इसे बारासिंघा का नाम दिया गया है। वयस्क नर मृग की सिर से पूँछ तक की लम्बाई 80 से 190 सेन्टीमीटर एवं कंधे से जमीन तक की ऊँचाई 120 से 135 सेन्टीमीटर तथा वजन 170 से 200 किलो मादा मृग छोटी एवं बगैर सींग के होती है। नर मृग में सींग की शुरूआत सात माह के पश्चात होने लगती है तथा सींग तीन वर्ष में पूर्णत: विकसित होते हैं। इसकी विशिष्ट मैदानी पहचान नर मृग के शाखायुक्त सींग (antler) होते हैं जिनकी शाखाओं की संख्या एक-तरफ छ: एवं दूसरी ओर छ: होने के कारण इसे बारासिंघा का नाम दिया गया है। इस मृग की दो अन्य प्रजातियाँ हैं उत्तरप्रदेश एवं उत्तराखण्ड के तराई क्षेत्र में जलमय भूमि की प्रजाति Recurvus duvaucelii duvaucelii एवं आसाम तथा पूर्वोत्तर में Recurvus duvaucelii ranjitsinhii.

प्राकृतिक वास : मध्य भारत के घासयुक्त मैदानी कीचड़ एवं पानी भरे हुए उथले मैदान जिसमें लम्बी घास होती है विशेष तौर पर साल वृक्ष के वनों के आस-पास के क्षेत्र । वर्तमान में केवल कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में पाया जाता है। इसके संरक्षण के लिये कुछ संख्या में नर एवं मादा मृगों को सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान में पुनर्स्थापित किया गया है।
व्यवहार : शर्मीला मृग है जो बहु नर एवं मादा झुण्‍ड में रहता है तथा अपनी सुरक्षा के लिये चीतल आदि मृग के संकट-सूचना पर निर्भर करता है।

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